खुशहाली की राहें
दिलबाग सिंह विर्क
प्रेम ही संसार की नींव है। हमारे मोहल्ले में एक शिक्षक महोदय ने कुत्ते के छोटे-छोटे बच्चों की सेवा -सुश्रुसा की। उन्हें टीके लगवाए। वर्क फ्रॉम होम करते हुए बिटिया ने कुछ समय उनकी सेवा-सुश्रुषा के लिए निकाला। मैंने उस डॉग लवर से बातचीत भी की, उसने बताया कि वह उनकी सेवा इसलिए करता है कि उसे आत्म संतुष्टि मिली। मुझे अच्छी तरह से याद है कोविड-19 के पहले दौर में भयभीत लोग अपने-अपने घर के भीतर थे परंतु सरकारी कर्मचारी पूरी मुस्तैदी से फील्ड में घूम रहे थे। मेरे दो सहकर्मी अक्सर अपनी कार में चारा खरीदते थे तथा सड़क के किनारे खड़ी भूखी गायों को खिलाया करते थे। तभी पता चला कि कुछ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुबह जब लोक सेवा के लिए जाती थीं तो साथ में अपने सामर्थ्य अनुसार कुछ बिस्कुट और कुछ रोटी या खाद्य पदार्थ लेकर जाती थीं। यकीन मानिए उन दिनों मेरी दोस्ती गिलहरी से हो चुकी थी। सुबह 5 बजे नींद खुलती थी और मैं छोटी सी कटोरी में पानी तथा कुछ दाने वगैरह डाल दिया करता था। गिलहरियां आतीं, दाने खातीं और चली जातीं। लेकिन एक दिन बहुत देर से उठने के कारण गिलहरियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। उनका यह प्रेम देखकर ईश्वरीय सत्ता पर विश्वास हो गया।ज़हर अगर एक बूंद भी होता है या उससे आधा भी, असर जरूर करता है। बहुत दिनों तक किसी सरफेस को आप अनदेखा करें तो पाएंगे कुछ दिनों में उस सरफेस पर आपका अधिकार न होकर धूल के कणों का हो जाता है। जीवन के लिए यही एक सिद्धांत है कि अपने मानस पर जम रही धूल को हटाते जाइए। किसी के प्रति नजरिया नेगेटिव रखिए तो वह व्यक्ति बहुत भयानक नजर आएगा। मन उसके आते ही उत्तेजना से भर जाएगा और सुलगने लगेगी विध्वंसक आग।
आप दुनिया को अपने तरीके से चलाना चाहते हैं और जो आप के तरीके को स्वीकार नहीं करता उससे आप घृणा करने लगते हैं। अक्सर जब आप किसी के लिए कुछ करते हैं या पारिवारिक रिचुअल्स में अर्थात् पारिवारिक परंपराओं के कारण कुछ आर्थिक, मानसिक व शारीरिक रूप से करते हैं यह कार्य ईश्वर के अलावा किसी के कारण नहीं होता। अपने कार्यों का बखान करवाना, करना तथा जिसके लिए कार्य किया है उसे अपना जरखरीद गुलाम मान लेना। जब वह व्यक्ति परिस्थितिवश आप की गुलामी न स्वीकार करे तो उसे बेइज्जत करना या बार-बार उसे अहसास दिलाना। फिर उस पर क्रोध व्यक्त करना, कुटिल तथा व्यंग्यात्मक शैली में बोलना क्रोध और कुंठा का जनक है। इसलिए ऐसी शैली बदलिए और प्रसन्न रहिए।
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