यूपी में अनुदेशकों-रसोइयों को नये साल में बढ़ कर मिलेगा मानदेय
लखनऊ, 29 दिसंबर (वार्ता) बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों की मांग को पूरा करते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27,546 अंशकालिक अनुदेशकों के मासिक मानदेय में दो हजार रूपये और तीन लाख 78 हजार रसोइयों का मानदेय 500 रूपये की मासिक बढोत्तरी करने का ऐलान किया है।
बुधवार को अनुदेशकों और रसोइयों के साथ संवाद के एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की “ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की तर्ज पर अब रसोइयों को भी हर साल दो साड़ी मिलेगी, साथ ही पांच लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर भी दिया जाएगा। वहीं, एप्रन व हेयर कैप की धनराशि उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।”अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस विशिष्ट कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से अनुदेशक और रसोइयों जिस उम्मीद से आए थे, मुख्यमंत्री ने उन्हें उसका दोगुना दिया। सीएम से संवाद करते हुए लगभग सभी अनुदेशकों ने सात हजार रूपये मात्र के अल्प मानदेय की पीड़ा साझा करते हुए बढ़ोतरी की अपील की तो रसोइयों ने भी अपना दर्द बांटा। सीएम योगी एक-एक कर सबको सुनते रहे। कोई घर से दूर तैनाती और अल्प मानदेय की समस्या से परेशान था तो किसी ने योगी सरकार से बेहतरी की आखिरी उम्मीद कहा। सभी का दर्द सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में बेसिक शिक्षा विद्यालयों के सुधार में अनुदेशकों की भूमिका को सराहा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में जिस व्यवस्था के तहत अनुदेशकों की नियुक्ति हुई थी, अलग-अलग कारणों से वह खंडित हो गई लेकिन राज्य सरकार ने किसी की सेवाएं समाप्त नहीं कीं। मात्र सात हजार रूपये के मासिक मानदेय को बढ़ाये जाने की मांग को वाजिब बताते हुए सीएम में इसमें दो हजार रूपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर इसे सम्मानजनक स्तर पर ले जाने की घोषणा की।
इसके साथ ही योगी ने अनुदेशकों की सेवाओं को व्यवस्थित करने का भरोसा दिलाते हुए आवश्यक कदम उठाने के लिए विभाग को निर्देशित किया। वहीं रसोइयों के कार्यदायित्व को सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने रसोइयों के हित में एक के बाद एक कई ऐलान किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 03 लाख 78 हजार रसोइया वर्तमान में सेवारत हैं। सबकी अपनी मांग है पर सरकार की भी अपनी सीमा है। बावजूद इसके वर्ष 2018 में रसोइयों का मानदेय एक हजार रूपये से बढ़ाकर 1500 रूपये मासिक किया गया। अब कोरोना की चुनौतियों को देखते हुए एक बार फिर इसमें पांच सौ रूपये की बढ़ोतरी की जा रही है। उन्होंने रसोइयों को मनमाने ढंग से सेवा से निकाले जाने को अनुचित बताते हुए नवीनीकरण के लिए पाल्य के नामांकन संबंधी नियमों में परिवर्तन के लिए विभाग को निर्देशित किया।
इस मौके पर बेसिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका ‘उन्नयन के साढ़े चार वर्ष’का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा में व्यापक परिवर्तन का श्रेय शिक्षकों, अनुदेशकों, रसोइयों, औऱ विभागीय अधिकारियों के सामूहिक प्रयास को दिया। उन्होंने कहा कि 2017 में अगर भाजपा की सरकार नहीं आती तो निश्चित ही बहुत से परिषदीय विद्यालय बंद हो गए होते। न जाने कितने शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों और रसोइयों की सेवाएं पर खतरा आ जाता। छात्र संख्या लगातार कम हो रही थी। ऐसे में सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को जनांदोलन बनाने का प्रयास किया। नामांकन कराने, स्कूल में बच्चों के आने का प्रयास हुआ, परिणामतः आज 54 लाख नये बच्चे बीते साढ़े चार साल में इन विद्यालयों से जुड़े हैं।
व्यापक सराहना पाने वाले ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यालयों के शैक्षिक परिवेश में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संकल्प, विद्यालयों में साधन-संपन्नता और व्यापक जनसहभागिता की बात कही। उन्होंने बताया कि एक समय था कि 75 फीसदी बालक नंगे पैर आते थे, हमने सबको जूता मोजा दिया। ठंड में स्वेटर दिया, दो गणवेश की व्यवस्था की। सीएम ने कहा कि कोरोना काल में पूरी दुनिया में कर्मचारियों के वेतन में कटौती हुई। 16 लाख शासकीय कर्मचारी उत्तर प्रदेश में हैं, लेकिन किसी की कोई कटौती नहीं हुई। हमने फिजूल खर्च को रोका, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई। 15 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल की चुनौतियों से भी अनुदेशकों और रसोइयों को अवगत कराया। कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस मौके पर बेसिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका ‘उन्नयन के साढ़े चार वर्ष’का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा में व्यापक परिवर्तन का श्रेय शिक्षकों, अनुदेशकों, रसोइयों, औऱ विभागीय अधिकारियों के सामूहिक प्रयास को दिया। उन्होंने कहा कि 2017 में अगर भाजपा की सरकार नहीं आती तो निश्चित ही बहुत से परिषदीय विद्यालय बंद हो गए होते। न जाने कितने शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों और रसोइयों की सेवाएं पर खतरा आ जाता। छात्र संख्या लगातार कम हो रही थी। ऐसे में सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को जनांदोलन बनाने का प्रयास किया। नामांकन कराने, स्कूल में बच्चों के आने का प्रयास हुआ, परिणामतः आज 54 लाख नये बच्चे बीते साढ़े चार साल में इन विद्यालयों से जुड़े हैं।
व्यापक सराहना पाने वाले ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यालयों के शैक्षिक परिवेश में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संकल्प, विद्यालयों में साधन-संपन्नता और व्यापक जनसहभागिता की बात कही। उन्होंने बताया कि एक समय था कि 75 फीसदी बालक नंगे पैर आते थे, हमने सबको जूता मोजा दिया। ठंड में स्वेटर दिया, दो गणवेश की व्यवस्था की। सीएम ने कहा कि कोरोना काल में पूरी दुनिया में कर्मचारियों के वेतन में कटौती हुई। 16 लाख शासकीय कर्मचारी उत्तर प्रदेश में हैं, लेकिन किसी की कोई कटौती नहीं हुई। हमने फिजूल खर्च को रोका, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई। 15 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल की चुनौतियों से भी अनुदेशकों और रसोइयों को अवगत कराया। कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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