बदलाव, विस्तार के मार्ग पर बढ़ी भाजपा, बंगाल में जमाया पांव

 नयी दिल्ली, 30 दिसंबर ( वार्ता ) भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) ने वर्ष 2021 में चार राज्यों में मुख्यमंत्री बदलकर सत्ता विरोधी लहर से निपटने और नए नेतृत्व को आगे लाने का सियासी दांव चला। वहीं पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर स्थापित होकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत की।

कोविड की महामारी के बावजूद वर्ष 2021 भाजपा के खाते में प्रगति दर्ज करके विदा हो रहा है। बदलाव और विस्तार के मार्ग पर इस साल भाजपा ने अभूतपूर्व छाप छोड़ी। उसने जहां गुजरात में संपूर्ण मंत्रिमंडल और अन्य दो राज्यों में कर्नाटक, उत्तराखंड मुख्यमंत्रियों को बदल कर पार्टी के समूचे कैडर को जनता के प्रति जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता का संदेश दिया, वहीं पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में दमदार प्रदर्शन से खुद को नंबर दो की राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित किया।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने गुजरात में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित पूरी मंत्रिमंडल को बदलकर हमेशा की तरह राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया। पहली बार विधायक चुने गए भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया और नया मंत्रिमंडल गठित किया। श्री रूपाणी से पहले कर्नाटक में पार्टी के सबसे मजबूत नेता श्री बी एस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। लिंगायत नेता श्री येदियुरप्पा की जगह लिंगायत समुदाय से ही आने वाले बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया गया।

वहीं, उत्तराखंड में भाजपा ने दो बार मुख्यमंत्री बदले। पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह गढ़वाल के सांसद तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन कुछ ही महीने बाद तकनीकी कारणों से उन्हें हटना पड़ा और उनकी जगह पुष्कर सिंह धामी को कमान सौंपी गई।

असम में चुनाव नतीजों में भाजपा ने सत्ता में वापसी की लेकिन सर्बानंद सोनोवाल की जगह पार्टी के कर्मठ नेता हिमंत बिस्व सरमा को मुख्यमंत्री बनाया गया। भाजपा ने चार राज्यों में अपने मुख्यमंत्री बदले, लेकिन किसी भी राज्य में कोई सियासी बगावत के सुर नहीं सुनाई दिये जिससे पता चलता है कि पार्टी का नेतृत्व मज़बूत है और होमवर्क भी चाकचौबंद है। इसलिए विरोध की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती।

उत्तर प्रदेश में 2022 चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रहीं थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के अपने दौरे में अपनी रैलियों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामों की तारीफ कर इन अटकलों को विराम देने की कोशिश की। श्री मोदी ने लखनऊ दौरे पर श्री आदित्यनाथ के कंधों पर हाथ भी रख कर तस्वीरें खिंचवायीं जिससे यह संदेश साफ हो गया राज्य में श्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को कोई चुनौती नहीं है। श्री मोदी के साथ भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा भी एक बयान में स्पष्ट कर चुके हैं कि 2022 में पार्टी उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव याेगी आदित्यनाथ के अगुवाई में लड़ेगी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भाजपा ने तगड़ी चुनौती पेश की। भाजपा भले ही राज्य की सत्ता से दूर रह गयी लेकिन वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर चुनावी शिकस्त देने में कामयाब रही। चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की बड़ी जीत और भाजपा की हार पर विपक्ष ने कहा कि भाजपा को तृणमूल कांग्रेस ने असली सबक सिखा दिया। पश्चिम बंगाल में जीत के दावे कर रही भाजपा के लिए चुनाव परिणाम भले ही बड़ा झटका दिखें लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले चुनाव में तीन सीटें जीतने वाली भाजपा इस चुनाव में 77 सीटें जीतकर राज्य में चार नंबर की पार्टी से नंबर दो की पार्टी और इस प्रकार से मुख्य विपक्षी दल बन गई। पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन की तुलना 2021 के चुनाव से करें तो यह उसकी एक बड़ी उपलब्धि रही। पश्चिम बंगाल में दलितों के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ा है और उसने 68 सुरक्षित सीटों में से उसे 39 सीटों पर जीत हासिल की।

भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की इस भिड़ंत में कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां साफ हो गईं। आजादी के बाद से ऐसा पहली बार हुआ कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के एक भी विधायक नहीं चुना गया। बंगाल में भाजपा सरकार नहीं बना पाई लेकिन विपक्ष की पूरी जगह उसने अपने पाले में कर ली।

पश्चिम बंगाल के साथ हुए असम राज्य में चुनाव में भाजपा दोबारा से सत्ता में वापसी करने में कामयाब रही तो पुडुचेरी में पहली बार भाजपा गठबंधन सहयोगी के तौर पर सरकार में शामिल हुई। हालांकि केरल में भाजपा को एक भी सीट हासिल नहीं हुई लेकिन पार्टी को 11 फीसदी से अधिक वोट मिले जो भाजपा के लिए केरल में अब तक का सर्वाधिक था। तमिलनाडु में भाजपा ने 20 वर्ष बाद चार सीटें जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया जिसे पार्टी ने संतोषजनक प्रदर्शन माना।

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन और किसानों की नाराजगी के देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कदम पीछे खींच लिए और इन कानूनों को वापस ले लिया। इस तरह दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसानों ने एक वर्ष बाद आंदोलन समाप्त कर घर वापसी शुरू कर दी। सरकार के इस फैसले से अगले वर्ष पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष के हाथ से केंद्र सरकार पर निशाना साधने वाला बड़ा मुद्दा निकल गया। भाजपा ने श्री मोदी के इस कदम को भुनाने में देर नहीं की। भाजपा ने कहा कि श्री मोदी अपनी घोषणा के प्रति ईमानदार हैं और यह उनके किसान हितैषी होने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वर्ष 2021 में श्री मोदी ने अपने विकास कार्यों के साथ-साथ हिंदुत्व के एजेंडे को भी केंद्र में रखा जिनका चुनावी फायदा उठाने की कोशिश मे भाजपा आगे रही। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, चार धाम परियोजना, कोरोना के बावजूद कुंभ का आयोजन, उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड रद्द करना और केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण ऐसे काम रहे, जो भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे को उभारने वाले माने जा रहे हैं। भाजपा ने 2021 में अपनी नयी 80 सदस्यीय कार्यकारिणी की घोषणा भी की। इसके अलावा अन्य सदस्यों को मिलाकर करीब साढ़े तीन सौ सदस्य इस कार्यकारिणी में शामिल हैं। इस कार्यकारिणी से भाजपा सांसद वरुण गांधी और उनकी माँ मेनका गांधी तथा सुब्रह्मण्यम स्वामी को बाहर कर दिया गया।

कोरोना काल के बाद पहली बार श्री नड्डा की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की बैठक हुई। इस बैठक में पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं की आलोचना की गयी। साथ ही कोरोना बचाव के टीकाकरण अभियान और किसान हितों के लिए सरकार की ओर से चलायी जा रही योजनाओं के लिए सरकार की प्रशंसा की गयी।

भाजपा ने 2021 वर्ष में संगठन स्तर पर 'सेवा ही संगठन' ,पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर देश भर के लोगों से पार्टी के लिए चंदा इकट्ठा करने का 'अंशदान कार्यक्रम' , स्वच्छता अभियान , संसदीय क्षेत्रों में खेल स्पर्धा आयोजन जैसे कार्यक्रम चलाए। इसके अलावा बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए पहले से चल रहे 'पन्ना प्रमुख' अभियान को सोशल मीडिया से जोड़ने का कार्यक्रम शुरू किया।

भाजपा के लिए 2022 में सबसे बड़ी चुनौती पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करना है। इनमे से पंजाब को छोड़कर सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है लिहाजा पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे तो 2024 के आम चुनाव की दृष्टि से देश के भविष्य की सियासी तस्वीर तय करेंगे।

पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल के साथ हमेशा छोटे भाई की भूमिका में रही भाजपा के लिए 2021 में नए सियासी समीकरण उभरे हैं। कांग्रेस ने पार्टी की अंर्तकलह की वजह से कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर उनकी जगह चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया तो भाजपा ने इसमें अपना सियासी मौका ढूंढ लिया। कैप्टन सिंह ने पंजाब लोक कांग्रेस नाम से अपनी पार्टी बना ली और भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। इसके साथ ही शिरोमणि अकाली दल से नाराज़ होकर पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने अकाली दल संयुक्त पार्टी बनाई और भाजपा के साथ उन्होंने भी गठबंधन कर लिया। इस प्रकार भाजपा को पंजाब में दो महत्वपूर्ण सहयोगी मिल गए और पहली बार भाजपा चुनाव में बड़े भाई की भूमिका में आ गयी।

वर्ष 2022 में भाजपा अध्यक्ष श्री नड्डा का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन पांच राज्यों के चुनाव नतीजे उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर भी अहम है। यह देखना दिलचस्प होगा कि श्री नड्डा को भाजपा अध्यक्ष के तौर पर दूसरा कार्यकाल मिलता है या नहीं।

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