दद्दू प्रसाद वर्मा बुंदेलखंड में बिगाड़ सकते हैं बसपा का गणित
बांदा, 29 दिसंबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं का बदलना तेज हो गया है जिससे क्षेत्र विशेष में संबंधित पार्टी विशेष की संभावनाओं को पर लग रहे हैं।
बुंदेलखंड में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कद्दावर नेता एवं पार्टी संस्थापक कांशीराम के बेहद करीबी रहे दद्दू प्रसाद वर्मा के समाजवादी पार्टी का दामन थामने के बाद बुंदेलखंड में बसपा का गणित गड़बड़ा सकता है और सपा को फायदा होने के आसार बन गये हैं।चुनाव से पहले नेताओं के राजनीतिक समीकरण साधने के क्रम में कभी बसपा संस्थापक कांशीराम के अति करीबी माने जाने वाले एवं बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके बुंदेलखंड के श्री वर्मा ने सपा का दामन थाम लिया है। बसपा के तमाम दिग्गज नेताओं और बसपा संस्थापक कांशीराम के मूवमेंट तथा उसके बाद जुड़े ज्यादातर प्रमुख रसूखदार नेता अब बसपा से बाहर हो चुके हैं। श्री वर्मा ने भी पार्टी से जुड़े रहने की काफी कोशिशें की। कांशीराम के देहांत के बाद पार्टी से निकाले जाने के बाद श्री वर्मा ने न तो किसी दूसरी पार्टी का हाथ थामा और न ही चुनाव लड़ा लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भी सपा का दामन थाम लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्री वर्मा की अनुसूचित जातियों के बीच लोकप्रियता का फ़ायदा समाजवादी पार्टी को मिल सकता है। उन्होंने कांशीराम के समय और उससे भी पहले से बांदा सहित पूरे बुंदेलखंड में अनुसूचित वर्ग को बसपा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर बहुत जबरदस्त काम किया था और इसी कारण पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के अनुसूचित वर्ग पर उनकी बहुत अच्छी पकड़ मानी जाती है। बसपा सरकार के समय कैबिनेट मंत्री रहने के बाद भी उन्होंने क्षेत्र के लिए काफी काम किया। विश्लेषकों के अनुसार पूर्व मंत्री यदि पूरी मेहनत और लगन से सपा के लिए काम करने लग जाये तो बांदा विधानसभा सहित बबेरू नरैनी और तिन्दवारी विधानसभा सीटों पर ही नहीं पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के अनुसूचित जाति का एक बड़ा वोट बैंक सपा के पाले में आ सकता है।
श्री वर्मा के सपा से जुड़ने से बुंदेलखंड में पार्टी कितनी सीटें जीत पायेगी, यह तो समय ही बताएगा लेकिन श्री दद्दू प्रसाद वर्मा के रूप में बुंदेलखंड में समाजवादी पार्टी को एक बड़ा चेहरा तो मिला ही है।
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