इलेक्ट्रिक इंजन निर्माण को बढ़ावा दे रहा है वाराणसी का रेल कारखाना
वाराणसी 30 दिसंबर (वार्ता) वाराणसी का रेल इंजन कारखाना जहां डीजल इंजन का निर्माण कर इस क्षेत्र में निर्यात क्षमता को बढ़ा रहा है वहीं देश का प्रदूषण कम करने के मकसद से कारखाने में इलेक्ट्रिक रेल इंजनों के निर्माण पर भी जोर दिया रहा है।
कारखाने की महाप्रबंधक अंजली गोयल ने गुरुवार को यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस कारखाने में डीजल इंजन का निर्माण किया जा रहा है और तंजानिया, मलेशिया, म्यामार, सेनेगल, सूडान, अंगोला, श्रीलंका, मोजांबिक बांग्लादेश सहित कई देशों ने इसका निर्यात हो रहा है।उन्होंने कहा कि अब तक कंपनी ने 'मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड विजन' के तहत 171 इंजनों का निर्यात किया है। कंपनी ने हाल ही में मोजांबिका को करोड़ के 92 करोड़ रुपए के 3000 एच पी केप गेज इंजनों का निर्यात किया है।
महा प्रबंधक ने बताया कि कंपनी अब इलेक्ट्रिक इंजनों के निर्यात को बढ़ावा दे रही है और इस दिशा में तेजी से निर्माण का काम चल रहा है। उनका कहना था कि 2016-17 में कारखाने से दो विद्युत यात्री रेल इंजनों के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था उसकी क्षमता 2020-21 में बढ़कर रिकॉर्ड 275 रेल इंजनों तक पहुंच गई है।
सुश्री गोयल ने कहा कि वाराणसी डीजल इंजन कारखाने से घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में इलेक्ट्रिक इंजनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए यह काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि 27 दिसंबर 2021 तक इस कारखाने से देश के लिए 967 विद्युत रेल इंजनों का निर्माण हुआ है उनका यह भी कहना था की विद्युत लोकोमोटिव उत्पादन में 98 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है और यह सूक्ष्म, लघु उद्यमों और घरेलू निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा बनारस कारखाने में दुनिया में पहली बार कुछ अश्वशक्ति की डीजल लोकोमोटिव को विद्युत लोकोमोटिव में सफलतापूर्वक बदलने का काम किया श्रीमती गोयल ने कहा कि देश में इस कारखाने से हर साल 400 से अधिक इंजनों का निर्माण किया जा रहा है और उनकी योजना जल्दी ही मेरे क्षेत्र के लिए भी डीजल इंजन की निर्माण की है और वहां से भी उन्हें अब ऑर्डर मिलने के प्रस्ताव मिले हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें