ईआर शेख बने आयुध निदेशालय के पहले महानिदेशक
नयी दिल्ली 30 सितंबर (वार्ता) सरकार ने आयुध कारखाना बोर्ड (ओएफबी) की जगह गठित आयुध निदेशालय (समन्वय एवं सेवाएं) के महानिदेशक पद पर पहली बार ईआर शेख की नियक्ति की है। आज जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के मुुताबिक श्री शेख ने अपना कार्यभार संभाल लिया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के पढ़े श्री शेख भारतीय आयुध कारखाना सेवा (आईओएफसए) के 1984 बैज के अधिकारी है। वह गोला-बारूद बनाने वाली रक्षा मंत्रालय के इन कारखानों के आधुनिकीकरण अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने आयुध निर्माण कारखना-वरनगांव (महाराष्ट्र) में छोटे हथियारों के गोला-बारूद के उत्पादन की एक आधुनिक विनिर्माण सुविधा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।उन्होंने उप महानिदेशक ( प्रणोदक एवं विस्फोटक) के रूप में विस्फोटक बनाने वाली आयुध विनिर्माण इकाइयों के संयंत्र आधुनिकीकरण का काम कराया। इससे इनमें उत्पादकता, गुणवत्ता और सुरक्षा बढ़ी। उन्होंने तोप के गोला-बारूद के लिए बाई-माडुलर चार्ज प्रणाली (बीएमसीएस) के विकास के काम का सफलता पूर्वक नेतृत्व किया। शेख को उनकी अनुकरणीय सेवाओं के लिए 2020 में आयुध रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
सरकार 220 वर्ष से सेना के लिए गोलाबारूद की आपूर्ति करते आ रहे आयुध कारखाना बोर्ड (ओएफबी) को भंग करके एक अक्टूबर 2021 से इसके तहत आने वाली 41 इकाइयों को नयी व्यवस्था में लाने का निर्णय कर चुकी है। इन कारखानों को रक्षा मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की सात कंपनियों में पुनर्गठित किया जाएगा। इन कंपनियों की पूरी हिस्सेदारी सरकार के पास होगी। सरकार का कहना है कि इससे इन इकाइयों के काम और उत्पादकता में सुधार आएगा।
आयुध कारखानों का कुल वार्षिक उत्पादन करीब 19 हजार करोड़ रुपये है। इनमें 70 हजार से अधिक कर्मचारी हैं। शुक्रवार से आएफबी का काम समाप्त हो जाएगा। आगे इसका काम आयुध निदेशालय देखेंगा।
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