प्रकृति संरक्षण के उद्देश्य से प्रकृति वंदन दिवस अति महत्वपूर्ण :-भारत शाखा ( RSS )

(रवि गुप्ता)

 प्रकृति वंदन  दिवस हमें प्रकृति के प्रति प्रेम, श्रद्धा और संरक्षण को प्रेरित करता है । प्रकृति से ही हमारे जीवन का अस्तित्व है।  वर्तमान  में जिस प्रकार पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है, ऐसी परिस्थिति में प्रकृति बंधन दिवस का मनाया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण विषय है । हमारी सनातन संस्कृति मनुष्य मात्र को ही नहीं बल्कि ब्रह्मांड को ईश्वर का विराट स्वरूप मानती है और विराट स्वरूप में ईश्वर सूक्ष्म रुप में भी विराजमान है ।पूरे विश्व में केवल हमारी संस्कृति है जो एक व्यक्ति को परिवार से, परिवार को समाज से ,समाज  को विश्व से जोड़कर एक परिवार के रूप में देखती है । हमारी संस्कृत की जड़ें इतनी परिष्कृत और व्यापक है कि हमारे प्रत्येक कार्य का वैज्ञानिक विश्लेषण स्वयं सिद्ध है। सिर्फ हमारी संस्कृत में ही चूहे से लेकर हाथी तक और दूब से लेकर पीपल तक की पूजा की जाती है । हमारी संस्कृत में सभी को यथा उचित स्थान दिया गया है, जिसमें वृक्ष एक विशेष महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं । कपितया कारणों से आज जिस प्रकार पौधों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, उसको रोकने की दिशा में पर्याप्त कदम भी उठाए जा रहे हैं मगर हर मानव का कर्तव्य है कि वह पौधों को लगाए ताकि भविष्य में आने वाली नस्लों को एक अनुकूल पर्यावरण मिल सके।

  उक्त बातें हैं भरत शाखा ( RSS  ) के स्वयंसेवकों की है जो अपने घरों और क्षेत्रों में उपस्थित पेड़ पौधों की पूजा करते हुए यथासंभव वृक्षारोपण भी किए और अन्य लोगों को भी प्रकृति वंदन दिवस के अवसर पर वृक्षों वनस्पतियों की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया ।

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