अंबेडकर के समता मूलक समाज के मकसद को पूरा कर रही है भाजपा सरकार: कोविंद

 लखनऊ, 29 जून (वार्ता) राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने मंगलवार को कहा कि केन्द्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भगवान बुद्ध के वाक्य और भारत रत्न डा भीमराव अंबेडकर के उद्देश्य ‘भवतु सब्ब मंगलम’ को सही मायने में पूरा कर रही है।

लोकभवन में मंगलवार को भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का वर्चुअल शिलान्यास किया। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डा दिनेश शर्मा मौजूद थे। श्री कोविंद ने कहा कि भगवान बुद्ध के वाक्य ‘भवतु सब्ब मंगलम’ का आत्मसात करना लोकतंत्र में हर सरकार का दायित्व है जिसका अर्थ है प्रजा की भलाई। भगवान बुद्ध के विचारों से प्रभावित डा अंबेडकर के समता मूलक समाज की परिकल्पना को भाजपा की सरकारें पूरा कर रही है।

उन्होने कहा कि डा अंबेडकर ने 93 साल पहले आज ही के दिन समता मूलक समाज की परिकल्पना के साथ ‘समता’ नामक समाचार पत्र का प्रकाशन आरंभ किया। उनका संपूर्ण जीवन समता मूलक समाज की रचना में ही व्यस्त रहा। समाज मूलक समाज के मूल शिल्पी बाबा साहब ने संविधान में भी समता का जिक्र किया। उनके दिलोदिमाग में समता और समरसता गुंजायमान थी।

राष्ट्रपति ने कहा कि समता मूलक समाज के उद्देश्य के साथ 93 साल पहले शुरू की गयी बाबा साहब की यात्रा के आज हम सब साक्षी बने है। लखनऊ को बाबा साहब की स्नेह भूमि भी कहा जाता है। उनका लखनऊ से विशेष लगाव था। भगंत बोधानंद जी से उन्होने दीक्षा ली थी जिनका निवास लखनऊ में था। इस नाते उनका लखनऊ में अक्सर आना होता था।

केन्द्र सरकार बाबा साहब से जुड़े स्थानों को पंचतीर्थ स्थल के तौर पर विकसित कर रही है जिसमें मध्यप्रदेश में महू, नागपुर में दीक्षा स्थल पर स्मारक,मुम्बई में चैतन्य भूमि पर बाबा साहब अम्बेडकर स्मारक नई दिल्ली में अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर और अलीपुर रोड पर अम्बेडकर मेमोरियल शामिल है जहां डॉ अम्बेडकर का महापरिनिर्वाण हुआ।

पंच तीर्थ के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 नवंबर, 2015 को लंदन में अम्बेडकर स्मारक का उद्घाटन किया।

उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार की परंपरा को आगे बढाते हुये उत्तर प्रदेश सरकार ने यहां डा. भीमराव अंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास किया। यूपी सरकार की इस पहल जितनी सराहना की जाये कम है।

श्री कोविंद ने कहा कि डा अंबेडकर शिक्षाविद, अर्थशास्त्री,राजनीतिज्ञ,पत्रकार, समाज सुधारक के साथ साथ संस्कृति, धर्म और अध्यात्म के अच्छे जानकार थे और उन्होने विभिन्न क्षेत्रों में भी अपना अमूल्य योगदान दिया है। बैंकिंग, इरिगेशन, इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम, लेबर मैनेजमेंट सिस्टम, रेवेन्यू शेयरिंग सिस्टम, शिक्षा व्यवस्था समेत तमाम क्षेत्रों पर संविधान के शिल्पकार के योगदान की छाप है।
उन्होने कहा कि बाबा साहब के ‘विजन’ में चार बातें नैतिकता,समता,आत्म-सम्मान और भारतीयता सबसे महत्वपूर्ण रही है। उनका कहना था कि सरकार का मिशन सबकी भलाई होनी चाहिए। इसी कारण सभी सरकार को उनके अनुभव का अनुसरण करना चाहिए। आज लोग हिंदू-मुस्लिम करते हैं, बाबा साहब कहते थे कि हम सब पहले और बाद में भी केवल भारतीय हैं।
श्री कोविंद ने कहा, भगवान बुद्ध के विचारों का भारत की धरती पर इतना गहरा प्रभाव है कि भारतीय संस्कृति के महत्व को न समझने वाले साम्राज्यवादी लोगों को भी महात्मा बुद्ध से जुड़े सांस्कृतिक आयामों को अपनाना पड़ा। राष्ट्रपति भवन के गुबंद से लेकर संसद भवन में स्पीकर के स्थान के पीछे बना आकार भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन की छाप छोड़ता है। डॉ अंबेडकर ने भगवान बुद्ध के विचारों को प्रसारित किया। उनके इस प्रयास के मूल में करुणा, बंधुता, अहिंसा, समता और पारस्परिक सम्मान जैसे भारतीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का और सामाजिक न्याय के आदर्श को कार्यरूप देने का उनका उद्देश्य परिलक्षित होता है।
उन्होने कहा कि बाबा साहब आधुनिक भारत के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के पक्षधर थे। वे महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए सदैव सक्रिय रहे। डा अंबेडकर की दूरदर्शी सोच समय से बहुत आगे थी। उनके मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप समाज व राष्ट्र का निर्माण करने में ही हमारी वास्तविक सफलता है। इस दिशा में हमने प्रगति अवश्य की है लेकिन अभी हमें और आगे जाना है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार डा अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चल रही है। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में जब भी वंचितों, दलितों, उपेक्षितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हुए व्यक्ति की आवाज की बात होगी तो बाबा साहब का नाम बड़ी श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जायेगा।
इससे पहले राष्ट्रपति ने लोकभवन में बटन दबाकर ऐशबाग में बनने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर सांस्कृति केंद्र का शिलान्यास किया। संविधान निर्माता की स्मृति में बनवाये जाने वाले स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र में डा अंबेडकर की 25 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई जाएगी और उनके अस्थि कलश को भी दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके साथ ही 750 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, आभाषी संग्रहालय, पुस्तकालय, शोध केंद्र, डॉरमेट्री, कैफेटेरिया सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।
श्री कोविंद पिछली 25 जून की रात को अपने गृह नगर कानपुर के तीन दिवसीय दौरे पर विशेष ट्रेन प्रेसीडेंसियल एक्सप्रेस से पहुंचे थे जिसके बाद वह सोमवार सुबह विशेष ट्रेन से लखनऊ आये। वह आज शाम विशेष विमान से वापस दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।
प्रदीप
वार्ता

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

खुशहाली की राहें

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना