बेजुबानों को खिलाने से मिलता है मन को सुकून : ऐश्वर्या

पवन गुप्ता


 गोरखपुर। घूम-घूम कर अपना पेट भरने वाले बेजुबान जानवर भी कोरोना काल में दाने के लिए तरसने लगे हैं। इन बेजुबान जनवरों को खाना खिलाने के लिए शहर की वरिष्ठ समाजसेवी ऐश्वर्या पाण्डेय ने पहल शुरू की है। वह प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को कभी रोटी तो कभी मनपसंद मौसमी फलों की टोकरी लेकर अपनी गाड़ी से कुसम्ही जंगल पहुंच जाती हैं और जंगल में रहने वाले बंदरों को बड़े प्रेम से भोजन एवं फल अपने हाथों से खिलाती हैं। श्रीमती पांडे का यह क्रम कई वर्षों से चल रहा है और कोरोना काल के दिनों में भी अनवरत जारी रहता है। अब तो जंगल के सभी बंदर भी ऐश्वर्या को पहचानने लगे हैं। वहां पहुंचने पर सभी इनके करीब आ जाते हैं और अपनी भाषा में कोलाहल शुरू कर देते हैं। मानो इनका स्वागत कर रहे हों। श्रीमती पांडेय कहती हैं कि इन बेजुबानों को कुछ खिलाने से मन को काफी सुकून मिलता है।

श्रीमती पांडेय कहती है कि इन बेजुबानों के बिना मानव जाति का अस्तित्व खतरे मे पड़ सकता है। कोरोना की वजह से हमारे आसपास जीपन-यापन करने वाले कुछ जानवरों के लिए पेट भरना भी मुश्किल हो रहा है। जंगलो में रहने वाले बंदरो के सामने भी भूख एक बड़ी समस्या बन गई है। कुसम्ही जंगल में सड़क के दोनों ओर काफी बंदर देखे जाते हैं। जंगलो मे खाद्य की कमी होने से ये बंदर सड़क पर भोजन की तलाश मे निकलते हैं। बुढ़िया माई मंदिर जाने वाले भक्तों व आगे जाने वाले यात्रियो से इन बंदरो को खाने के लिए काफी कुछ मिलता था। परन्तु कोरोना काल की वजह से आवाजाही कम होने की वजह से इन बंदरो के सामने भी खाने के लाले हैं। ऐसे मे श्रीमती पांडेय की यह मुहिम  वन्य जीवों के लिए काफी मुफीद साबित हो रही है।

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