रेल से राख भेजने वाला देश का पहला विद्युत संयंत्र बना एनटीपीसी रिहंद
सोनभद्र, 30 मार्च (वार्ता) एनटीपीसी के रिहंद स्टेशन में बीजली उत्पादन के बाद बची कोयले की राख को बीटीएपी रेल डिब्बों से भेजने वाला देश का पहला विधुत संयत्र बन गया है।
एनटीपीसी के कार्यकारी निदेशक बालाजी आयंगर ने बताया की बीटीएपी रेल डिब्बों से राख भेजने वाला देश का पहला संयत्र रिहंद एनटीपीसी संयत्र बन गया है। उन्होंने कहा कि राख उपयोगिता की वृद्धि में इसका प्रभावी कदम है। बिजली उत्पादन के बाद बचीए राख का 51 प्रतिशत विभिन्न परियोजनाओं द्वारा उपयोग में लायी जा रही हैं। वाराणसी रिंग रोड परियोजना के निर्माण में एनटीपीसी रिहंद से फरवरी माह तक 2.74 एलएमटी राख भेजी जा चुकी है।उन्होंने बताया कि रिहंद बिजली संयत्र की 3000 मेगावाट की क्षमता के अतिरिक्त 20 मेगावाट सौर ऊर्जा का कार्य निर्माणाधीन है। रिहंद स्टेशन पर्यावरण संरक्षण एवं उद्योग समन्वय में भी महत्वपूर्ण भूमिका को निभा रहा है। उन्होंने बताया की रिहंद स्टेशन के कर्मियों एवं अधिकारियों में विषम से विषम परिस्थितियों में भी चुनौती स्वीकार करने की क्षमता है । इस बात का जीता जागता प्रमाण यह है कि चालू वित्तीय वर्ष में कोविड-19 के बावजूद भी रिहंद स्टेशन उपलब्धियों से भरा रहा। यह स्टेशन 500 मेगावाट से शुरू होकर आज 3000 मेगावाट उत्पादन की क्षमता वाला स्टेशन बन गया है।
श्री आयंगर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान एनटीपीसी समूह नें देश की कुल स्थापित क्षमता के 17 प्रतिशत भाग से कुल बिजली में 22 प्रतिशत योगदान दिया है । कंपनी ने वर्ष 2032 तक 1,30,000 (एक लाख तीस हज़ार) मेगावाट की स्थापित विद्युत क्षमता पैदा करने का लक्ष्य स्थापित किया है । निगम सामाजिक दायित्व निर्वहन की कड़ी में ग्रामों के सार्वांगीन विकास में भी सीएसआर विभाग अहम भूमिका का निर्वहन कर रहा है। वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान रिहंद स्टेशन एवं इसकी स्वयंसेवी संस्थाओं नें बढ़चढ़ कर लोगों की सहायता के लिए काफी योगदान दिया है। यह स्टेशन उत्पादन के साथ-साथ पुरस्कारों में भी काफी कीर्तिमान हासिल किया है।
सं त्यागी
वार्ता
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