पांच करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वाले जीएसटी कर दाता के लिए एचएसएन कोड/ सर्विस अकाउंटिंग हुआ अनिवार्य

 नयी दिल्ली 31 मार्च (वार्ता) पांच करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले जीएसटी करदाता के लिए 6 अंकों वाला एचएसएन कोड प्रस्तुत करना (नामकरण कोड का हार्मोनाइज्ड सिस्टम) और करयुक्त वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर रसीद जारी करते वक्त सर्विस अकाउंटिंग कोड (एसएसी) गुरुवार से अनिवार्य कर दिया गया है।

इसके अलावा ऐसे जीएसटी करदाता जिनका पिछले वित्तीय वर्ष में 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर है, उन्हें बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) रसीद पर 4 अंकों का एचएसएन कोड देना जरूरी होगा। इसके पहले क्रमशः 4 अंकों और 2 अंकों की जरूरत थी ।
इस आधार पर जीएसटी करदाता को एक अप्रैल 2021 से अपने रसीद में एचएसएन/एसएसी की जानकारी देना अनिवार्य हो गया है।
वस्तुओं के लिए 6 अंकों वाला एचएसएन कोड सभी जगह के लिए मान्य है। इसलिए सीमा शुल्क और जीएसटी के लिए एक ही एचएसएन कोड होगा। इस आधार पर सीमा शुल्क के लिए तय कोड का इस्तेमाल जीएसटी (जिनका खास तौर से जीएसटी दर सूची में उल्लेख किया गया है) के लिए भी किया जा सकेगा। सीमा शुल्क में एचएस कोड को हेडिंग (4 अंकों वाला एचएस), सब हेडिंग (6 अंकों वाला एचएस) और टैरिफ आयटम (8 अंक) के रुप में परिभाषित किया गया है। यह दस्तावेज सीबीआईसी की वेबसाइट पर प्राप्त किए जा सकते हैं।
मैन्युफैक्चरर्स और आयातक / निर्यातक एक ही एचएसएन कोड का इस्तेमाल करते हैं। मैन्युफैक्चरर्स जीएसटी व्यवस्था से पहले भी इन कोड की जानकारी देते थे। आयातक/निर्यातक इन कोड की जानकारी आयातक/निर्यातक दस्तावेज में भी डालते थे। इसी तरह ज्यादातर ट्रेडर्स मैन्युफैक्चरर या आयातक द्वारा वस्तुओं की आपूर्ति के समय जारी रसीद पर भी एचएसएन कोड की जानकारी देते थे। ऐसे में बड़े पैमाने पर जीएसटी करदाता 6/8 अंकों वाले एचएस कोड्स/एसएसी की अपनी रसीद, ई-वे बिल और जीएसटीआर-1 रिटर्न में स्वैच्छिक रुप से जानकादी पहले से ही दे रहे हैं।
शेखर.संजय
वार्ता

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