चौरीचौरा में वास्तविक श्री कृष्ण कथा वेद प्रवचन एवं देव यज्ञ आयोजन
अभय कुमार जायसवाल
आचार्य जी ने कथा कहते हुए कहा कि भगवान श्री राम तथा श्री कृष्ण जी का जीवन पूर्ण वैदिक जीवन था दोनों ही वेद वेदांग के प्रकांड विद्वान थे। आचार्य जी ने कहा कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है कि योगीराज श्री कृष्ण का जीवन आप्त पुरुषों का जीवन था। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में कोई भी धर्म विरुद्ध कार्य नहीं किया। योगेश्वर श्रीकृष्ण के चरित्र हनन का घृणित प्रयास निंदनीय है। उन्होंने श्री कृष्ण कथा करते हुए बताया कि श्री कृष्ण जी ने ईश्वर प्रणिधान योग उपासना द्वारा अपने जीवन को शुद्ध और पवित्र बना दिया था। श्री कृष्ण जी की केवल एक ही पत्नी रुक्मणी जी थीं। दोनों पति पत्नी ने विवाह के पश्चात 12 वर्ष तक बद्रिकाश्रम में तपस्या का पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन कर तब संतानोत्पत्ति किया था। उनकी मात्र एक ही संतान प्रदुम जी थे। आचार्य जी ने कहा कि श्री कृष्ण जी का गृहस्थ जीवन एक तपोमय गृहस्थ जीवन था।उन्होंने कहा कि गृहस्थ एक तपोवन है जिसमें संयम सेवा और सहिष्णुता की साधना की जाती है। अतः हमें श्री कृष्ण जी के जीवन के आदर्श ब्रह्मचर्य एवं आदर्श गृहस्थ को शिक्षा लेनी चाहिए क्योंकि श्री कृष्ण जी 48 वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन कर आदित्य ब्रह्मचारी हो गए थे। वह अपने समय के सर्वोत्तम वेदज्ञ, योद्धा एवं नीतिकार थे। कथा निरंतर 4 मार्च 2021 तक चलती रहेगी।
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