सैकडो वर्षो की परंपरा कायम रखने के लिये कल से शुरू होगा इटावा महोत्सव

 

इटावा , 30 जनवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश मे यमुना नदी के किनारे बसे इटावा जिले मे आजादी पूर्व से आयोजित होते आ रहे ऐतिहासिक इटावा महोत्सव का शुभारंभ 31 जनवरी को शाम 4 बजे से शुरू होगा ।इटावा की जिलाधिकारी श्रीमती श्रुति सिंह ने महोत्सव आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि इटावा महोत्सव की ऐतिहासिकता को बनाए रखने के लिए इस महोत्सव को परंपरा के आधार पर बरकरार रखते हुए आयोजित करवाया जा रहा है।उन्होंने बताया कि महोत्सव में इस बात को भी दृष्टिगत रखा जाएगा कि कोविड-19 के नियमो का पालन हर हाल में किया जाए।महोत्सव कमेटी की अध्यक्ष जिलाधिकारी श्रुति सिंह ने बताया कि विगत 100 वर्षों से जारी इटावा महोत्सव की परंपरा को ध्यान में रखते हुए कोविड 19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए इटावा महोत्सव का शुभारंभ किया जा रहा है । इसमें आने वाले दुकानदारों को कोविड की निगेटिव जांच रिपोर्ट लाना अनिवार्य है । पंडाल में आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमो में आने वाली भीड़ को देखते हुए इस बार सप्ताह में 1 आयोजन होगा।इटावा महोत्सव मे आने वाली भीड़ भाड़ को देखते हुए इस बार महोत्सव परिसर के आसपास के इलाके को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है।इस बार वाहन स्टैंड सर्कस वाले इलाके में बनाया गया है। कोई भी 3 पहिया और 4 पहिया वाहन नुमाइश के किसी भी गेट के पास नही जा पायेगा। इसके लिये नुमाइश चौराहा, ग्वालियर बस स्टैंड तिराहे पर बेरिकेटिंग की जा रही है। इटावा महोत्सव हर साल दिसंबर माह मे आयोजित हुआ करता था लेकिन इस दफा कोरोना के कारण इसका आयोजन जनवरी को किया जा रहा है । एक माह तक चलने वाले इस महोत्सव के जरिये इटावा की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रखी जाती है। यह ऐतिहासिक महोत्सव वर्ष 1910 में शुरू हुआ था और तब से लेकर अब तक लगातार चला आ रहा है । प्रतिवर्ष नवम्बर-दिसम्बर के महीने में महोत्सव लगता रहा है । एक शताब्दी से अधिक समय से चली आ रही इस नुमाइश में ने अब इटावा के लोगों के दिलों में अपना स्थान बना लिया है और वार्षिकोत्सव की तरह हो गई है । यही कारण है कि अब इसे इटावा महोत्सव भी कहा जाने लगा है । एक महीने तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं लेकिन इस दफा यह मंचीय कार्यक्रमो से दूरी बना ली गई है । इटावा महोत्सव की जिले में ही नहीं बल्कि प्रदेश में अपनी अलग पहचान है ।वैसे इटावा प्रदर्शनी का आरंभ 1888 में तत्कालीन जिलाधिकारी एचजी अलेक्जेंडर द्वारा एक छोटे से मेले के रूप में पक्का तालाब पर किया गया था । उसके बाद यह बंद हो गया था, लेकिन सन 1910 में जिला मजिस्ट्रेट एचके ग्रेसी द्वारा इसे पुनर्जीवित किया गया ।महोत्सव की एक विशेषता यह भी है कि ये ग्वालियर के मेले के बाद एकलौता ऐसा महोत्सव है जो अपने निजी पक्के और विशाल प्रांगण में आयोजित किया जाता है।पहले इसका नाम इटावा प्रदर्शनी एवं पशुमेला के नाम से किया जाता था, बाद में इसका नाम इटावा महोत्सव कर दिया गया । महोत्सव को आयोजित किये जाने वाले प्रांगण के एक हिस्से का निर्माण सन 1910 में किया गया था जो कि धीरे धीरे विशाल प्रांगण में तब्दील होता गया है । आज इस महोत्सव की विशाल चार दीवारी के अंदर सैकडों दुकानें, पार्क और बड़े बड़े मैदान हैं।


सं विनोद

वार्ता

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