दुधवा टाईगर रिजर्व एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व खोले जायेंगे एक नवम्बर से

लखनऊ 30 अक्टूबर(वार्ता) उत्तर प्रदेश सरकार ने दुधवा टाईगर रिजर्व एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व को एक से नवम्बर से आम जनता के लिये खोले जाने का निर्णय लिया है।
मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार ने शुक्रवार को यहां बताया कि राज्य में स्थित टाइगर रिजर्व से आमजनता को जोड़ने एवं प्रकृति की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक नवम्बर से पर्यटन सत्र-2020 शुरू किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री दारा सिंह चौहान दुधवा टाईगर रिजर्व एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व में अपराह्न 12 बजे से एक बजे के मध्य पर्यटन सत्र-2020 का ऑनलाइन उद्घाटन करेंगे।
श्री कुमार ने बताया कि दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पूर्व में पर्यटन सत्र 15 नवम्बर से आरम्भ हुआ करता था। लोगों के सुझाव मिले कि अन्य प्रदेशों में टाइगर रिजर्व 15 अक्टूबर से खोल दिये जाते है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजर्वो को भी खोला जाये। प्रदेश सरकार द्वारा दुधवा व पीलीभीत टाइगर रिजर्व को एक नवम्बर से पर्यटकों के भ्रमण के लिये खोले जाने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि ईको पर्यटन से जुड़ने वाले लोगों की तादाद बढ़ रही है। लोग पर्यावरण को लेकर संवेदनशील हो रहे हैं। साथ ही वन एवं वन्य जीव के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी आ रही है।
श्री मुकेश कुमार ने बताया कि ईको पर्यटन की मंशा भी यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोग वन एवं वन्य जीव संरक्षण के अभियान से जुड़ें एवं सरकारी तंत्र को सहयोग पहुॅचायें। ऐसे सुधिजनों की लम्बे समय से चल रही मांग आज पूरी हो रही है। उन्होंने बताया कि यह ऐसा संक्रमणशील वर्ष है, जिसमें पूरा विश्व कोविड-19 जैसी महामारी से जूझ रहा है। इसी कारण पिछला सत्र 18 मार्च को निर्धारित अवधि से पूर्व ही बन्द करना पड़ा था। केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के स्तर से समय-समय पर निर्गत दिशा-निर्देशों के आलोक में इस पर्यटन सत्र में पर्यटकों से अतिरिक्त सावधानियाॅ बरती जायेगी। पर्यटन सत्र के दौरान मास्क लगाने, सामाजिक दूरी बनाये रखने एवं समय-समय पर सेनेटाइजेशन प्रक्रिया अपनाने की अपेक्षा की गई है।
मुख्य संरक्षक ने बताया कि प्रदेश में दो टाइगर रिजर्व हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व वर्ष 1988 से स्थापित है, जबकि पीलीभीत टाइगर रिजर्व वर्ष 2014 में अस्तित्व में आया है। उन्होंने बताया कि वन्य जीव संरक्षण की हमारे राज्य में पूर्व से ही गौरवशाली परम्परा रही है। आज भी देश ही नहीं पूरे विश्व में दुधवा एवं पीलीभीत के साल वनों की ख्याति है। जैव विविधता के मामले में भी दोनों ही टाइगर रिजर्वो में प्रचुरता दर्शित होती रही है। दुधवा जहाॅ बाघ, तेन्दुआ, भेड़िया, हाथी, गैण्डा एवं भालू की आश्रय स्थली रहा है, वहीं यहाॅ पर बारहसिंघा का अनूठा प्राकृत्वास है।
भंडारी
वार्ता


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