कारगिल योद्धा राजेश मिश्र ने शहीद साथियों को याद कर दी श्रद्धांजलि : कारगिल विजय दिवस
गोला/गोरखपुर, कारगिल युद्ध में अपने जाबांज साथियों के साथ देश के दुश्मनो को लोहे का चना चबवा देने वाले गोरखपुर जनपद के गोला थाना अंतर्गत भरसी गांव निवासी नव पैरा कमांडो एवं शौर्य चक्र विजेता राजेश मिश्रा कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई को अपने शहीद साथियों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया।श्री मिश्रा ने कारगिल विजय दिवस पर रविवार को एक वार्ता के दौरान बताया कि असाधारण व अकल्पनीय लक्ष्य को प्राप्त करने की उन शूरवीरों की अमरगाथा को बताते हुए मुझे अत्यंत रोमांच की अनुभूति हो रही है।बार-बार उन बलिदानियों के अदम्य साहस व सर्वोच्च बलिदान को अश्रुपूरित नेत्रों से सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने में हम सभी को अपार गर्व है।जिन्होंने वर्ष 1999 में 25-26 जुलाई को 14 हजार से 17 हजार फीट तक कि दुर्गम उचाइयो पर जहां दुश्मन घात लगाकर बैठे हुए थे और देश के सैनिक नीचे से ऊपर चढ़कर बैठ गए थे।उस समय अपने देश के सैनिकों के सामने कठिन चुनौती थी।एक तरफ दुश्मन घात लगाकर दुर्गम ऊची पहाड़ियों पर बैठा है उससे लड़ते हुए अपना मुकाम हासिल करना था और दूसरे तरफ उन्हें भगाना काफी चुनौतीपूर्ण था लेकिन नव पैरा कमांडो जो एक मात्र इस युद्ध मे भाग लेने वाली विशेष बल की बटालियन थी जिसका हिस्सा मै स्वयं भी था।जो भारतीय सेना की सर्वोच्च बटालियन है जिसका नाम के अनुरूप लक्ष्य का निर्धारण किया गया।उन दुर्गम पहाड़ियों में बटालियन को युद्ध स्थल तक गोलों और गोलियों के बीच उन्हें एकत्रित किया गया जिसे युद्ध के समय आवश्यकता पड़ने पर उनका प्रयोग किया जा सके।ऐसा लक्ष्य जिसकी अपेक्षा दुश्मन ने भी नही की थी।अंततः लक्ष्य की ओर बटालियन बढ़ने लगी दुर्गम उच्चतुंग शिखर चट्टान गोले और गोलियों के बीच कमांडो लक्ष्य तक पहुंचे जिसकी कल्पना दुश्मन ने सपने में भी नही की थी।भीषण युद्ध हुआ दुश्मन भाग खड़ा हुआ जिससे टाइगर हिल मदर बेस सैंडो टॉप खाली हुआ और दुश्मनों में हाहाकार मच गया और सीजफायर को दुश्मन विवश हो गया।पाक देश की सेना भाग खड़ी हुई।देेश के इस बटालियन के 13 कमांडो ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।उन बलिदानियों के योगदान से देश और सीमा को सुरक्षित हम कर पाए है।कारगिल विजय दिवस पर पुनः उनको श्रद्धां सुमन अर्पित करता हूँ।
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