अखिलानंद प्रकरण- आईटी एक्ट का न्यायालय ने किया निस्तारण

कुशीनगर। सोसल मीडिया पर विधायक रजनीकांत मणि के खिलाफ टिप्पणी किये जाने को लेकर वायरल आडियो के आधार पर दर्ज किये गये मुकदमा को कुशीनगर के अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा आधारहीन कगार देते हुए निस्तारण किया गया है। इस दौरान न्यायालय ने विवेचक का स्क्रू टाइट करते भविष्य मे इस तरह की गलती न दोहराने की हिदायत दी। 
 गौरतलब है कि जनपद के कसया पुलिस ने 3 जून को कसया विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी पर टिप्पणी किये जाने के वायरल आडियो के खिलाफ प्राप्त तहरीर के आधार पर अखिलानंद राव उर्फ राजा के विरुद्ध अपराध संख्या 302/2020 धारा 504,507 व 67 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया था। इसके बाद अखिलानंद ने अपर सत्र न्यायाधीश, पाक्सो कोर्ट नम्बर - 3 कुशीनगर के वहा अग्रिम जमानत के लिए अर्जी प्रस्तुत किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सफीउल्लाह खान द्वारा प्रस्तुत किये गये अग्रिम जमानत को गम्भीरता से लेते हुए न्यायालय ने विवेचक से पूछा कि " क्या आडियो मे अश्लील भाषा का प्रयोग व अश्लील मैटेरियल है।"  इस पर विवेचक ने कहा कि कोई अश्लील मैटेरियल नही है। फिर न्यायालय द्वारा यह पूछा गया कि जब आडियो मे कोई अश्लील मैटेरियल नही है तो फिर आईटी एक्ट के धारा का प्रयोग किस आधार पर किया गया है जिस पर विवेचक निरुत्तर रहे। इसी दौरान अखिलानंद राव के बचाव पक्ष मे खडे अधिवक्ता सफीउल्लाह खान ने न्यायालय का ध्यान आकृष्ट कराते हुए आईपीसी की धारा 504 व 507 के सन्दर्भ मे विवेचक से पढवाने के लिए आग्रह किया। बताया जाता है कि बचाव पक्ष के अधिवक्ता के आग्रह को गम्भीरता से लेते हुए न्यायालय ने विवेचक से आईपीसी की धारा 504 व 507 पढने का निर्देश दिया, तत्पश्चात विवेचक से पूछा कि " क्या इन धाराओं के अन्तर्गत अपराध बनता है।" इस पर भी विवेचक ने कहा कोई अपराध नही बनता है। इसके बाद न्यायालय द्वारा विवेचक को भविष्य मे इस तरह की गलती न दोहराने जाने की हिदायत देते हुए श्री राव के जमानत को अन्तिम रुप से निस्तारित कर दिया।


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