राजनीति पंचायत चुनाव

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की आहट भी सुनाई पड़ने लग गयी है। राज्य में राजनीतिक गतिविधिया धीरे-धीरे शुरू होने लगी है। सरकार द्वारा जैसे जैसे ढ़ील दी गयी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चर्चाए शुरू हो गयी है। भाजपा ने इस मामले में बढ़त बना ली है। लाॅकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रवासी श्रमिकों को राज्य में वापस लाने तथा उनके लिए रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास मतदाताओं को लुभा सकते है। मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना पूरे देश में हुई है। इसका असर पंचायत चुनाव में देखने को मिल सकता है। पंचायत चुनाव में पार्टी अपना जनाधार और बढ़ाने की तैयारी में है।
भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी(बसपा) तथा प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी(सपा) की नजरें पंचायत चुनावों पर है। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा घर घर जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछना, खाद्य समाग्री बाटना तथा उनके नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पत्र चुनाव की तैयारिया माना जा रहा है।
उत्तर सरकार ने विभिन्न प्रदेशों में फंसे मजदूरों को वापस लाने के लिए विभिन्न राज्यों से 1,643 श्रम विशेष गाड़ियों को प्रायोजित किया था। उत्तर प्रदेश पहला राज्य था जिसने फंसे मजदूरों की निकासी शुरू की, इसके अलावा मनरेगा के तहत उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उनकी स्किल मैपिंग की गई।
जनवरी, 2018 में शुरू किया गया वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी लोगों के प्रवास के लिए स्थायी समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का कदम श्रम आयोग की स्थापना, इन चुनावों के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा होने की संभावना है।
दूसरी ओर, विपक्ष भी इसके लिए तैयार है। वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार को तगड़ा झटका दिया जाय।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, जब से महामारी का प्रकोप हुआ है, प्रवासी मजदूरों के दुख और उनकी आजीविका का मुद्दा बार बार उठा रहे है। इस मामले को लेकर लगातार योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला किया है।
सपा प्रवक्ता और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पार्टी कैडर पंचायत चुनाव में जुट गयी है। पार्टी चुनाव की रणनीति तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख नियमित रूप से राज्य भर में जमीनी स्तर के कैडर के साथ वीडियो काल कर रहे हैं, ताकि उनका उत्साह बना रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के मौजूदा मूड के बारे में फीडबैक लिया जा रहा है।
श्री चौधरी ने कहा, “ प्रवासी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिकों की दुर्दशा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिन्होंने तालाबंदी के कारण अपनी नौकरी को खो दिया। ”
हालांकि, भाजपा विपक्ष के दावों से हैरान है। जमीनी स्तर के कैडर तैयार किये जा रहे है। भाजपा ने जिलों के प्रभारियों के नाम घोषित कर दिए हैं।
भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि हम हर चुनाव को उसी जोश और तैयारियों के साथ विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह लड़ते हैं।


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