एनएसयूआई गोरखपुर के पूर्व जिला अध्यक्ष ने कुलपति को 4 सूत्रीय मांग पत्र डॉ प्रशांत शाही के संबंध में सौंपा



मनीष ओझा ने कहा कि सोशल साइट पर कांग्रेस पार्टी की नीतियों का उपहास सहायक आचार्य द्वारा उड़ाया गया जिसके तुरंत बाद मैंने अपनी फेसबुक आईडी से सहायक आचार्य द्वारा कांग्रेस की नीतियों के धूमिल करने के प्रयास को लोगों तक पहुंचाया जिसके बाद गोरखपुर के कांग्रेस नेताओं ने सहायक आचार्य डॉ प्रशांत शाही के खिलाफ कैंट में तहरीर दी जिसके बाद सहायक आचार्य डॉ प्रशांत शाही ने कांग्रेस के खिलाफ किए गए पोस्ट को Facebook से हटा दिया लेकिन हम सभी ने उनके द्वारा पहले किए गए पोस्ट को स्क्रीन शॉर्ट लेकर सुरक्षित रखा हुआ है
मनीष ओझा ने कहा कि सहायक प्रो. ने बढ़ते कार्यवाही की डर से पोस्ट को हटा अवश्य दिया है लेकिन एक औपचारिकता बस अपने Facebook वाल से सहायक आचार्य डॉ. प्रशांत शाही ने लिखा है कि ये हंसी,मज़ाक व अनजाने में मैंने काँग्रेस के खिलाफ पोस्ट किया था जिस पर NSUI गोरखपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष मनीष ओझा ने कहा कि सहायक आचार्य को अब भी अपनी गलतियों का एहसास नहीं है वे केवल ऊपरी मन से माफी मांगने वाली बात कही है
मनीष ओझा ने कहा कि प्रो. डॉ. प्रशांत शाही एक प्रतिष्ठित संस्थान में है जिसकी एक गरिमा है वो किसी भी विचारधारा से जुड़े हों हमे कोई आपत्ति नहीं मुझे यदि आपत्ति है तो केवल एक बात से की इस तरह से सोशल मीडिया के माध्यम से लोकप्रियता पाकर वो क्या बताना चाहते हैं क्या????  गोरखपुर विश्वविद्यालय में केवल संघीय विचारधारा के लोगों को तवज्जो दी जाएगी प्रोफेसर डॉ प्रशांत शाही के इस रवैया से कहीं न कहीं दो विचारधाराओं में टकराव हो चुका है जिससे कहीं ना कहीं विद्यार्थियों व गुरु के मधुर संबंधों में दरार की स्थिति उत्पन्न हो गई है यदि प्रोफेसर डॉक्टर प्रशांत शाही ने अपनी गलती नहीं मानी तो हम सभी कांग्रेस कार्यकर्ता उनके खिलाफ उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे


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