वाराणसी में मिला 3500-4000 वर्ष पूर्व बसावट का समृद्ध शहर,बुधवार से होगी खुदाई
वाराणसी, 23 फरवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश में वाराणसी के अराजीलाइन विकास खंड स्थित बभनियाव गांव के 3500-4000 वर्ष पूर्व मानव बसावट के समृद्ध शहर होने के अनुमान की सच्चाई पता लगाने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का एक दल बुधवार से वहां करीब एक किलोमीटर में फैले टिले की खुदाई शुरु करेगा।
बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रो0 अनिल कुमार दुबे ने रविवार को ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग एवं राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद खुदाई के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव में कैंप स्थापित कर दिया गया तथा पुरात्वेत्ता, शिक्षक, शोधार्थी समेत करीब 20-25 लोगों का एक दल बुधवार से खुदाई का काम शुरू कर देगा। खुदाई के क्रम में इस वर्ष अप्रैल या मई माह तक सर्वेक्षण से मिले संकेतों से जुड़ी कुछ ठोस जानकारी मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पुरात्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से गत वर्ष अक्टूबर में अनापत्ति प्रमाण पत्र मिला था।
प्रो0 दुबे ने बताया कि करीब चार साल पूर्व वाराणसी जिले के अराजीलाइन विकास खंड के बभनियाव गांव के 3500-4000 वर्ष मानव बसावट वाले समृद्ध छोटा शहर होने की प्रारंभिक जानकारी मिलनी थी। इसके बाद गत तीन वर्षों से सर्वेक्षण एवं खुदाई के तय मापदंडों के आधार पर गहन अध्ययन किये गए। सर्वेक्षण दौरान एक शिवलिंग मिला, जिस पर दो पंक्तियों में कुछ लिखा हुआ है। कुषाण ब्राह्मी लिपि में लिखित पंक्तियों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बरामद शिवलिंग उस वक्त के किसी प्रमुख व्यक्ति द्वारा स्थापित किया गया होगा। उन्होंने बताया कि इन पंक्तियों की सही-सही जानकारी कि लिए कुछ अन्य संबंधित भाषा विशेषज्ञों मदद ली जाएगी, उसके बाद ही संबंधित काल खंड के बारे में सटीक जानकारी मिल पायेगी हैं।
उन्होंने बताया कि अध्ययन में शिव लिंग के अलावा दीवार एवं मिट्टी से बनी चीजों के बारे में कई संकेत मिले हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पंचकोशी मार्ग के पास स्थित बभनियाव गांव आज से करीब करीब 3500-4000 वर्ष काफी समृद्ध रहा होगा। इसके आसपास से गंगा या उसकी कोई सहायक नदी गुजरती रही होगी।
प्रो0 दुबे ने बताया कि वर्तमान में वाराणसी जिला मुख्यालय से करीब 13-14 किलोमीटर की दूरी पर राजातालाब इलाके में स्थित यह गांव जातिगत करीब 4000 पूर्व ब्रह्मण बहुल रहा होगा। फिलहाल यहां करीब छह हजार की आबादी है, जिसमें सिर्फ एक ब्रह्मण परिवार है। यहां करीब 2500 मतदाता होने की जानकारी दल को मिली है। उन्होंने बताया कि टिले पर स्थित अधिकांश इलाके में लोगों के घर बने हुए हैं। करीब किलोमीटर के दायरे में खाली पड़े टिले की खुदाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मानव बसावट वाले समृद्ध शहर होने के बारे में जिस प्रकार के संकेत यहां के राजघाट, रामनगर, सारनाथ, कोतवाली, अकथा, तिलमपुर आदि इलाके में खुदाई के बाद मिले थे, ठीक उसी प्रकार के संकेत बभनियाव गांव में मिले हैं।
प्रो0 दुबे ने बताया कि खुदाई के मद में विभाग के पास करीब दो लाख रुपये हैं, लेकिन उन्हें विश्वास है कि काम शुरु होने के बाद सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से समुचित मदद मिल सकती है।
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