राहुल-प्रियंका पहुंचे मानवाधिकार आयोग

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (वार्ता) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के मानवाधिकार हनन के संबंध में उन्हें विस्तृत जानकारी दी।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आयोग से मुलाकात के बाद सोमवार को यहां पत्रकारों से कहा कि श्री गांधी तथा श्रीमती वाड्रा ने आयोग को उत्तर प्रदेश में नागरिकों के मानवाधिकार हनन के बारे में विस्तार अवगत कराया है। श्रीमती वाड्रा ने कई घटनाओं का जिक्र किया और तथ्यों के साथ आयोग को बताया कि वहां किस तरह से लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने कहा कि आयोग ने करीब आधा घंटे तक कांग्रेस नेताओं की बात सुनी। इस दौरान उन्हें घटनाओं के बारे में नौ बिंदुओं को लेकर सूचित किया गया और कुछ बिंदुओं पर विभिन्न घटनाओं के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गयी है। उन्होंने कहा कि राज्य में दिन दहाडे मानवाधिकारों का हनन हो रहा है।
प्रवक्ता ने कहा कि आयोग को यह भी बताया गया कि प्रदेश में 23 व्यक्तियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गयी है लेकिन एक भी पुलिसकर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। लोगों को गोली लगी है और उन पर चोट के निशान हैं । यहां तक कि प्रशासन को दोषी पुलिसकर्मियों तथा अधिकारियों के नाम भी दिए गये, वीडियो भी है लेकिन प्राथमिकी किसी भी पुलिसकर्मी के विरुद्ध नहीं हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में ‘मित्र पुलिस’ ज्यादती कर रही है। उनका यह भी आरोप था कि आर एस एस के लोगों को ‘मित्र पुलिस’ में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति की तस्वीर भारतीय जनता पार्टी के पोस्टर पर उसके नेता के रूप छपी है लेकिन एक वीडियो में वह ‘मित्र पुलिस’ बनकर हाथ में डंडा लिए वह गाडी से उतरता है और आगे बढता है तथा आवाम को धमकी देता है कि विरोध करेंगे तो कार्रवाई होगी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रतिनिधि मंडल ने आयोग से इस मामले में आयोग से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने तथा व्यापक कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने उम्मीद जतायी कि आयोग ने जिस तरह से उनकी बात सुनी है और कांग्रेस ने जिन तथ्यों के साथ आयोग को 31 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है उसे देखते हुए उम्मीद की जाती है कि इस मामले में आयोग जल्द कदम उठाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पुलिस ही खुद मानवाधिकारों का हनन कर रही है और खासकर पुलिस मित्र इस काम को बेरहमी से अंजाम दे रही है। पुलिस लोगों को धमका रही है और आंदोलन करने के उनके बुनियादी अधिकारों से रोकने की कोशिश कर रही है। धमकी दी जा रही है कि ऐसा नहीं करने पर संपत्ति जब्त की जाएगी।



 


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