फर्जी लाइसेंस प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट से भी होगी पूछताछ

फर्जी लाइसेंस प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट से भी होगी पूछताछ


 

गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र खरीदने के सनसनीखेज मामले में पुलिस कई सिटी मजिस्ट्रेट से भी पूछताछ करेगी। जांच कर रही एसआईटी के प्रभारी बोत्रे रोहन प्रमोद ने प्रशासन से वर्ष 2000 से अब तक तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेटों की सूची मांगी है। जिनके कार्यकाल में भी फर्जी लाइसेंस पकड़ में आए हैं, उन्हें नोटिस भेजकर पुलिस पूछताछ के लिए। चूंकि लंबे समय से फर्जी लाइसेंसों का नवीकरण भी हुआ है, इस वजह से मजिस्ट्रेट से पूछताछ कर जानकारियां हासिल की जाएंगी।
बीते 14 अगस्त को गोरखनाथ इलाके के तनवीर के पकड़े जाने के बाद फर्जी लाइसेंस का पूरा मामला सामने आया था। असलहा बाबू राम सिंह की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज किया था लेकिन जांच आगे बढ़ी तो वादी राम सिंह ही आरोपी बन गए। इनके अलावा अब तक दो अन्य असलहा बाबू भी जेल जा चुके हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में पुलिस 22 लोगों को जेल भेज चुकी है। जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। चंद दिनों पहले खोराबार थानाक्षेत्र से जो दस लोग पकड़े गए थे उनकी जांच में पता चला कि कई ऐसे लोग हैं जिनके असलहों का पिछले कई साल से नवीनीकरण हो रहा था और थाने में भी असलहा जमा करते रहे हैं। यह तथ्य सामने आने के बाद ही पुलिस की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट से पूछताछ करने का फैसला किया गया है। पुलिस, प्रशासन की मदद से इन लोगों को नोटिस जारी पूछताछ में यह जानने की कोशिश करेगी कि उनके समय में जांच हुई थी या नहीं। किस आधार पर नवीनीकरण और असलहा जमा करने की प्रक्रिया सामान्य तरीके से हो रही थी जबकि प्रशासन के दस्तावेज में ही लाइसेंस फर्जी हैं।
यह हुआ था
पुलिस और प्रशासन की जांच से खुलासा हुआ था कि एक ही यूनिक आईडी पर फर्जी तरीके से कई लोगों को लाइसेंस जारी कर दिया गया है। इसमें असलहा बाबू राम सिंह, विजय प्रताप के अलावा कई अन्य विभागीय लोगों की संलिप्तता सामने आई थी। मामला खुलने के बाद पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया था।
वर्ष 2000 से अब तक के बीच तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेटों से पूछताछ की जाएगी। इसके लिए प्रशासन की मदद से नाम मांगे गए हैं। जल्द ही नोटिस भेजकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - बोत्रे रोहन प्रमोद, एएसपी


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