राज्य सरकार द्वारा कन्या सुमंगला योजना बनाई गयी
गोरखपुुर , प्रदेश में बालिकाओं के स्वास्थ्य एंव शिक्षा के स्तर में वृद्धि करने तथा उनके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा कन्या सुमंगला योजना बनाई गयी है। इस योजना के क्रियान्वयन में बेटी बचाव बेटी पढ़ाओं की अवधारणा सुदृढ़ होगी तथा महिलाओं के सशक्तिकरण को बल मिलेगा। राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना से जहां बालिकाओं एंव महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा के साथ साथ विकास हेतु नये अवसर प्रदान होगे जिसके फलस्वरूप जहां एक तरफ कन्या भु्रण हत्या एंव बाल विवाह जैसी कुरीतियों के रोकथाम के प्रयासों कों बल मिलेगा वही दूसरी ओर बालिकाओं को उच्च शिक्षा व रोजगार के अवसरों की ओर बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा। उक्त योजना का शुभारम्भ 25 अक्टूबर को मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा लखनऊ से किया जायेगा।
यह जानकारी जिलाधिकारी के0 विजयेन्द्र पाण्डियन ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कन्या सुमंगला योजना के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक करते हुए दिये। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य एंव शिक्षा की स्थिति को सुदृढ़ करना, कन्या भु्रण हत्या को समाप्त करना, सामान लिंगानुपात स्थापित करना, बाल विवाह की कुप्रथा को रोकना, नवजात कन्या के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा बालिका के जन्म के प्रति आम जन में सकारात्मक सोच विकसित करना व उनके उज्जवल भविष्य की आधारशिला रखना है। उन्होंने कहा कि कन्या सुमंगला योजना के अन्तर्गत ज्यादा-ज्यादा से फार्म को अग्रसारित कर 25 अक्टूबर को पात्र लोगो को योजना का लाभ दिलाये। उन्होंने बीएसए/डीआईओएस को निर्देश दिया कि फार्म के अग्रसारण मे तेजी लाये तथा स्कूल लेबल पर इसकी समीक्षा करते रहें। इस योजना में सही कार्य न करने पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
जिलाधिकारी ने बताया है कि कन्या सुमंगल योजना के तहत बालिका के जन्म होने पर रू0 2000, बालिका के एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण के उपरान्त रू0 1000, कक्षा प्रथम में बालिका के प्रवेश लेने के उपरान्त रू0 2000, कक्षा 6 में बालिका के प्रवेश लेने के उपरान्त रू0 2000, कक्षा 9 में बालिका के प्रवेश लेने के उपरान्त रू0 3000 तथा ऐसी बालिकाएं जिन्होंने कक्षा 12वीं उत्तीर्ण कर के स्नातक अथवा दो वर्षीय या अधिक अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लिया हो रू0 5000 एकमुश्त प्रदान किया जायेगा। लाभार्थियों को योजना के अन्तर्गत देय धनराशि पी.एफ.एम.एस. के माध्यम से उनके खाते में सीधे हस्तान्तरित की जायेगी। प्राथमिक रूप में आवेदन आनलाइन माध्यम से स्वीकार किया जायेगा यद्यपि ऐसे आवेदक जो आनलाइन माध्यम से आवेदन करने में सक्षम नही है तो आफलाइन आवेदन खण्ड विकास अधिकारी/उप जिलाधिकारी/जिला परिवीक्षा अधिकारी/उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी के कार्यालय जमा कर सकते है। आवेदन का प्रारूप विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध है।
जिलाधिकारी ने बताया कि उक्त योजना में लाभ लेने के लिए लाभार्थी के परिवार का उ0प्र0 का निवासी होना तथा इसके पास स्थायी निवास प्रमाण पत्र जिसमे राशन कार्ड/आधार कार्ड/वोटर पहचान पत्र/विद्युत/टेलीफोन का बिल मान्य है। लाभार्थी के परिवार की वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख रू0 हो, किसी परिवार की अधिकतम दो बच्चियों को योजना का लाभ मिल सकेगा, किसी महिला को द्वितीय प्रसव से जुड़वा बच्चे होने पर तीसरी संतान के रूप में लड़की को भी लाभ अनुमन्य होगा। यदि किसी महिला को पहले प्रसव में बालिका है व द्वितीय प्रसव में दो जुड़वा बालिकाएं ही होती है तो केवल ऐसी अवस्था में ही तीनों बालिकाओं को लाभ अनुमन्य होगा। यदि किसी परिवार ने अनाथ बालिका को गोद लिया है तो परिवार की जैविक संतानों तथा विधिक रूप से गोद लिए गये संतानों को सम्मिलित करते हुए अधिकतम दो बालिकाएं इस योजना की लाभार्थी होगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अनुज सिंह, अपर जिलाधिकारी राकेश श्रीवास्तव,उपजिलाधिकारी गण, खण्ड विकास अधिकारी एंव विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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