गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 107वें वार्षिकोत्सव का भव्य समापन
आचार्य देवव्रत ने अभिभावकों को दी 'गुरुकुल ज्योतिसर' की सौगात
ब्रह्मचारियों ने मल्लखंभ, जिन्मास्टिक, कल्लरी, योगासन का किया शानदार प्रदर्शन
कुरुक्षेत्र, 19 अक्तूबर 2019: समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों से अपने बच्चों को बचाना वर्तमान समय में अभिभावकों के लिए एक गंभीर समस्या बन गया है, युवा पीढ़ी संस्कारों के अभाव में अपने लक्ष्य से भटक रही है। इसके विपरीत गुरुकुल कुरुक्षेत्र बच्चों में संस्कार, शिक्षा और सुरक्षा के अपने मूलमंत्र के साथ नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है और छात्रों का सर्वांगीण विकास कर रहा है। उक्त शब्द गुजरात के राज्यपालश्री एवं गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 107वें वार्षिक महोत्सव के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि कहे। उन्होंने गुरुकुल की वार्षिक-स्मारिका के विमोचन के उपरान्त ज्योतिसर में 'गुरुकुल ज्योतिसर' खोलने की घोषणा की। इस अवसर पर लेड़ी गर्वनर श्रीमती दर्शना देवी, ओएसडी टू गर्वनर डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार, मुख्य अधिष्ठाता विश्वबन्धु आर्य, राकेश जैन जी लुधियाना, गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी, निदेशक व प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता, सह प्राचार्य शमशेर सिह, नीलोखेड़ी गुरुकुल के निदेशक जगदीश आर्य, समाजसेवी महकार सिंह आदि उपस्थित रहे। मंच संचालन मुख्य संरक्षक संजीव आर्य द्वारा किया गया।
राज्यपालश्री ने कहा कि अभिभावकों की भावनाओं का सम्मान और ज्यादा से ज्यादा बच्चों के जीवन निर्माण हेतु गुरुकुल कुरुक्षेत्र की तर्ज पर आगामी सत्र में 'गुरुकुल ज्योतिसर' का शुभारम्भ किया जाएगा जिसमें एक हजार छात्रों के आवास और शिक्षण की सम्पूर्ण व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों का सर्वांगीण विकास गुरुकुल शिक्षा पद्धति से ही सम्भव है। आज देश में बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों में बच्चों को अक्षरज्ञान तो दिया जाता है मगर उनमें संस्कारों, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना नजर नहीं आती। देश-विदेश में फिर से गुरुकुलीय शिक्षा की ज्ञान-गंगा बहाने की जरूरत है और गुरुकुल परिवार इसके लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने बताया कि 'गुरुकुल ज्योतिसर' में भी गुरुकुल कुरुक्षेत्र की भांति ही एक नियमित दिनचर्या के तहत छात्रों का जीवन-निर्माण किया जाएगा। गुरुकुल शिक्षा पद्धति विश्व में सबसे बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित होगी जिससे समाज को एक नई दिशा व मार्गदर्शन मिलेगा।
समारोह में गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने योगासन, जिम्नास्टिक, कल्लरी, लाठी, बॉक्सिंग का शानदार प्रदर्शन किया। ब्रह्मचारियों द्वारा प्रस्तुत किया गया लकड़ी व रस्सी मल्लखम्भ अभिभावकों के आकर्षक का केन्द्र रहा। छोटे-छोटे बच्चों द्वारा लकड़ी के मल्लखम्भ पर हैरतअंगेज करतबों को देख सभी दर्शक दंग रह गये। इस अवसर पर गुरुकुल के प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित भी किया गया। इससे पूर्व 10 दिनों से चल रहे अथर्ववेद पारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति हुई जिसके यजमान गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शारदा सैनी रहीं। अन्त में गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सैनी ने समारोह में आए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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